पिता के निधन के बाद भी नहीं मानी हार, मां के हौसले और जुनून के दम पर हासिल किया मुकाम।
जनपद बदायूं की तहसील सहसवान क्षेत्र के ब्लॉक दहगवां स्थित गांव सोनबुढीं निवासी ऋषिपाल का भारतीय सेना में चयन होने पर पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है। ऋषिपाल की इस सफलता को ग्रामीण संघर्ष, मेहनत और लगन की जीत के रूप में देख रहे हैं। गांव पहुंचने पर लोगों ने मिठाई खिलाकर और शुभकामनाएं देकर परिवार की खुशी में भागीदारी निभाई।
ऋषिपाल ने बताया कि सेना में भर्ती होना उनका बचपन का सपना था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार कठिन मेहनत की। उन्होंने कहा कि सफलता की राह आसान नहीं थी। आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के साथ-साथ कई बार लोगों के ताने भी सुनने पड़े। कुछ लोग कहते थे कि “तुमसे कुछ नहीं होगा”, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और हर चुनौती का सामना पूरे आत्मविश्वास के साथ किया।
उन्होंने भावुक होकर बताया कि पिता इंदल सिंह के निधन के बाद वह अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे। उस कठिन दौर में उनकी मां नन्ही देवी ने उन्हें हिम्मत दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मां के संघर्ष, आशीर्वाद और अपने जुनून के दम पर उन्होंने खुद को संभाला और दिन-रात मेहनत जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन भारतीय सेना में हो गया।
ऋषिपाल की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि इंसान के इरादे मजबूत हों और वह मेहनत करने से पीछे न हटे, तो कोई भी मुश्किल उसे मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
गांव के लोगों ने ऋषिपाल को क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनकी कहानी उन युवाओं को नई दिशा देगी, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं।
ऋषिपाल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी मां नन्ही देवी, गुरुजनों और लगातार की गई मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि देश सेवा का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है और वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।





