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पं० दीन दयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजनान्तर्गत प्रदेश की अनुपजाऊ भूमि को बनाया जा रहा है कृषि योग्य।

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बदायूँ: 17 फरवरी। देश और प्रदेश में लगातार बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप अन्न के उत्पादन को बढ़ाना जरूरी है। शहरों के विस्तार एवं औद्योगीकरण से उपजाऊ भूमि घटती जा रही है। ऐसे में कृषि योग्य भूमि को बढ़ाना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में जमीन का बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां कुछ भौगोलिक परिस्थितियों के चलते किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं। बीहड़, बंजर, असमतल, ऊसर और जलभराव के कारण काफी जमीन बेकार पड़ी है। लगातार बढ़ रही जनसंख्या को खद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए कृषि उत्पादन व उत्पादकता में बढ़ोतरी जरूरी है और यह तभी संभव है जब खेती के लिए भूमि की उपलब्धता हो।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश की बंजर, बीहड़, ऊसर और असमतल, व जलभराव भूमि को कृषि योग्य बनाकर खेती का दायरा बढ़ाने पर बल दिया है। इससे उत्पादन तो बढ़ेगा ही, साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। प्रदेश सरकार पं0 दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत खराब पड़ी भूमि में से अधिक भूमि को खेती योग्य बनायी जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा प. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के तहत खराब पड़ी भूमि में से 03 लाख 07 हजार 450 हेक्टेयर से अधिक भूमि को खेती योग्य बनाया जा चुका है। इस भूमि पर किसान खेती कर फसलोत्पादन कर रहे है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना प्रदेश के 74 जिलों में लागू किया है। योजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि सुधार के विविध कार्यक्रम चलायें जा रहें है। किसानों, भूमिहीन मजदूरों, अनुसूचित जातियों की आवंटित भूमि दुरुस्त हो रही है और उन्हें अपने खेत के सुधार में काम करने पर मनरेगा से रोजगार भी मिल रहा है। प्रदेश में बीहड़, बंजर व जलभराव क्षेत्रों के सुधार व उपचार के लिए यह योजना चलाई जा रही है। गौतमबुद्ध नगर को छोड़कर प्रदेश के शेष 74 जिलों में यह योजना संचालित है।
इस योजना के तहत चयनित परियोजना क्षेत्र के सभी किसान व किसान मजदूर इसमे लाभार्थी होंगे। परियोजना क्षेत्र के चयन में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां लघु व सीमांत किसान और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसानों व भू-आवंटियो की अधिकता है। योजना के तहत चयनित परियोजना क्षेत्र में शत-प्रतिशत अनुदान पर बीहड बंजर भूमि सुधार व क्षेत्र सुधार का कार्य राज्य सेक्टर से और जलभराव क्षेत्र का उपचार कार्य मनरेगा से कराया जा रहा है। इस कार्य के लिए पांच साल में करोडों रुपये खर्च किए जा रहें है।
इस योजना से कृषि वानिकी, उद्यानीकरण के साथ फसलों का उत्पादन होगा। परियोजना क्षेत्र में सुधार की गई भूमि पर जरूरत के हिसाब से कृषि वानिकी व उद्यानीकरण के साथ ही उपचारित क्षेत्र में 50 प्रतिशत अनुदान पर फसलों का उत्पादन कराया जाता है। योजना के तहत लाखों हेक्टेयर बीहड़, बंजर भूमि का सुधार व जलभराव भूमि क्षेत्र का उपचार किया जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय व भूजल स्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है, साथ ही पांच साल में दो करोड़ मानव दिवस सृजित होने का अनुमान है।

प्रदेश में वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक पांच साल चली किसान समृद्धि योजना में 157190 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि को कृषि योग्य व अधिक उपजाऊ बनाया जा चुका है। इन वर्षों में योजना पर 332 करोड़ रुपये खर्च हुए थे और परियोजना क्षेत्र में विभिन्न फसलों के लिए 8.58 विवंटल प्रति हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई। उपचारित क्षेत्र के किसानों की आय में 48 प्रतिशत व भूजल स्तर में 1.42 मीटर की वृद्धि हुई है। प्रदेश में संचालित इस योजना के अन्तर्गत अब तक खराब पड़ी भूमि में से 03 लाख 07 हजार 450 हेक्टेयर से अधिक भूमि को खेती योग्य बनाया जा चुका है। इस भूमि पर किसान खेती कर फसलोत्पादन कर रहे है।

Shubh khabar

संपादक:–आकाश तोमर

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