मानसून की बारिश गर्मी से राहत और फ़िज़ा में ताज़गी तो लाती है, लेकिन इसके साथ नमी, जलभराव और मच्छरों की बढ़ती आमद कई बीमारियों का सबब भी बन सकती है। इन दिनों बुखार, वायरल इंफेक्शन, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, गले व सांस की तकलीफ़, पेट की ख़राबी और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं।
मरीज़ों से मेरी गुज़ारिश है कि तेज़ या लगातार बुखार को मामूली समझकर ख़ुद से एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएँ शुरू न करें। साफ़ और महफ़ूज़ पानी पिएँ, खुले में बिकने वाले अस्वच्छ भोजन से परहेज़ करें, हाथों की सफ़ाई का ख़ास ख़याल रखें और मच्छरों से हिफ़ाज़त के लिए रिपेलेंट तथा पूरे कपड़ों का इस्तेमाल करें।
हेल्थ प्रोवाइडर्स के लिए भी यह वक़्त ख़ास एहतियात और सतर्कता का है। हर बुखार को सिर्फ़ वायरल फीवर मानने के बजाय मरीज़ की हिस्ट्री, लक्षण, जांच और ज़रूरत के मुताबिक़ आवश्यक टेस्ट को अहमियत दी जाए। डेंगू या किसी गंभीर संक्रमण के शक में समय पर निगरानी और उचित रेफ़रल बेहद ज़रूरी है।
मानसून में एहतियात, बरवक़्त तश्ख़ीस और ज़िम्मेदार इलाज ही सेहत की हिफ़ाज़त का सबसे मज़बूत ज़रिया है।




